आरती मैया की गामें , सत्य दरबार बतलावें ।
सौभरि वंश में भाई , प्रगट माता भाई आई ।।
नाम हरदेई बतलावें ।। 1 ।। आरती
जन्म जो खायरे लीयो , व्याह फिर भक्त संग कियौ ।
नहीं पहचानि में आवें ।। 2 ।। आरती
गांम परसों में जो आई , दई संतानी प्रगटाई ।
अनोखे रूप दर्शामें ।। 3 ।। आरती
लांगुरा लांगुरी भाई , ज्योति सी दई दिखलाई ।
ख्याल नहीं हमें काया में ।। 4 ।। आरती
लड़ाई लड़न जो वारी , लड़त में कभी नांय हारी ।।
भुलाये क्रोध माया में ।। 5 ।। आरती
पति नें देह तजि दीनी , शांति प्रगट तन किन्हीं ।
क्रोध कूँ तिरांजली धामें ।। 6 ।। आरती
बात जो सुनि लई सबकी , क्रोध में नेंक नांई भावकी ।।
शांति बसी काया में ।। 7 ।। आरती
पती की भस्म पर जाई, देह में अग्नि प्रगटाई ।
रूप जब कई दिखलामें ।। 8 ।। आरती
कुंचा ते दूध धार आई , कलू में शक्ति दिखलाई ।
दर्श कर भक्त हरसामें ।। 9 ।। आरती
सुगंधी देह में आमें ।। 10 ।। आरती
ओमन सौभरि भुर्रक, भरनाकलां, मथुरा
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