Wednesday, July 17, 2019

Maa Sati HarDevi ji Ki Aarti

*सती हरदेवी मैया जी की आरती*



आरती मैया की गामें , सत्य दरबार बतलावें ।
सौभरि वंश में भाई , प्रगट माता भाई आई ।।

नाम हरदेई बतलावें ।। 1 ।। आरती

जन्म जो खायरे लीयो , व्याह फिर भक्त संग कियौ ।

नहीं पहचानि में आवें ।। 2 ।। आरती

गांम परसों में जो आई , दई संतानी प्रगटाई ।

अनोखे रूप दर्शामें ।। 3 ।। आरती

लांगुरा लांगुरी भाई , ज्योति सी दई दिखलाई ।

ख्याल नहीं हमें काया में ।। 4 ।। आरती

लड़ाई लड़न जो वारी , लड़त में कभी नांय हारी ।।

भुलाये क्रोध माया में ।। 5 ।। आरती

पति नें देह तजि दीनी , शांति प्रगट तन किन्हीं ।

क्रोध कूँ तिरांजली धामें ।। 6 ।। आरती

बात जो सुनि लई सबकी , क्रोध में नेंक नांई भावकी ।।

शांति बसी काया में ।। 7 ।। आरती

पती की भस्म पर जाई, देह में अग्नि प्रगटाई ।

रूप जब कई दिखलामें ।। 8 ।। आरती

कुंचा ते दूध धार आई , कलू में शक्ति दिखलाई ।

दर्श कर भक्त हरसामें ।। 9 ।। आरती

सुगंधी देह में आमें ।। 10 ।। आरती

ओमन सौभरि भुर्रक, भरनाकलां, मथुरा

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